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जब राज्यसभा में नहीं मिला मौका तो सचिन ने फेसबुक पर रखी अपनी बात, देखें VIDEO

राइट टू प्ले के तहत शिक्षा की तरह खेलों को भी स्कूलों में अनिवार्य करने के प्रस्ताव है।

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राइट टू प्ले के तहत शिक्षा की तरह खेलों को भी स्कूलों में अनिवार्य करने के प्रस्ताव है।

पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर राज्यसभा में गुरुवार को विपक्ष के हंगामे के चलते अपना पहला भाषण नहीं दे पाए थे । सचिन ने फेसबुक पर विडियो पोस्ट कर अपना वो भाषण पढ़कर सुनाया जिसे वह राज्यसभा में देना चाहते थे । सचिन का यह वीडियो भाषण 15.32 मिनट लंबा है और जिसमे उन्होंने  राइट टू प्ले यानी खेलने के अधिकार पर अपनी बातें रखीं ।

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सचिन ने अपने भाषण की शुरुवात हिंदी में की और फिर आगे की बात उन्होंने इंग्लिश-हिंदी  में बोली । तेंदुलकर के अपने भाषण में  राइट टू प्ले की अहमियत को समझाने का प्रयास किया है। सचिन इस वीडियो में कहते हैं:

  • मैं अपने पिता रमेश तेंदुलकरका हमेशा शुक्रगुज़ार रहूंगा क्योंकि उन्होंने मुझे खेलने की आज़ादी और खेलने का अधिकार दिया ।
  • गरीबी, आर्थिक वृद्धि, फूड सिक्योरिटी समेत देश में कई अहम मुद्दे हैं जिनपर ध्यान देने की ज़रूरत है । एक स्पोर्ट्समैन होने के नाते मैं खेल, इंडिया की फिटनेस और लोगों की सेहत पर बात करना चाहता हूं । मेरा विजन हेल्दी और फिट इंडिया है । जब स्वस्थ युवा हुआ, तब देश में कुछ हुआ ।
  • साल 2020 में भारत दुनिया के सबसे जवान देशों में से एक होगा । ऐसे मे धारणा ये है कि अगर युवा हैं तो फिट हैं लेकिन ये गलत है ।
  • हमारे देश के नागरिक डायबिटीज़, मोटापे जैसे बीमारियों के शिकार है । इन बीमारियों का आर्थिक बोझ हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है जिससे देश की प्रगति धीमी हो जाती है ।
  • मोबाइल फोन के जमाने में हम स्थिर होते जा रहा है।
  • हम खेल की बातें करते है लेकिन कभी खेलते नहीं है ।
  • हमें अपने देश को स्‍पोर्ट्स लविंग नेशन के बजाय स्‍पोर्ट्स प्‍लेइंग नेशन में बदलना होगा।
  • हमारे देश के पूर्वोत्तर राज्योंमें सिर्फ देश के 4% आबादी है लेकिन इन राज्यों ने देश को मीराबाई चानू ,मैरी कॉम, दीपा करमाकर, बाईचुंग भूटिया सरिता देवी जैसे अनेक खिलाड़ी दिए है ।
  • हमें देश में स्‍पोर्टस कल्‍चर बनाना होगा ।
  • खेल सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का बड़ा साधनहै ।
  • खेल में उम्र कोई सीमा नहीं है.।देश में मैराथन दोड़ने वाले सबसे बुजुर्ग कोच्ची के परमरेश्‍वरन 100 साल के हैं ।
  • बच्चों को खेल में बढ़ावा दिया जाए और अन्य विषयों की तरह खेल के नंबर दिए जाएं ।
  • मैं पेरेंट्स अपील करूंगा कि वे लड़के-लड़कियों को समान रूप से प्रोत्‍साहन दें। पीवी सिंधु, मिताली राज, सानिया मिर्जा, साइना नेहवालजैसी लड़कियों ने देश और अपने परिवार का नाम रौशन किया है ।
  • अमूमन 35-40 की उम्र में एक खिलाड़ी रिटायर हो जाता है । राष्ट्रीय स्तर और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तो कुछ संस्थानों की मदद मिल जाती है, लेकिन जिला और प्रदेश स्तर के खिलाड़ियों को सही से नौकरी तक नहीं मिल पाती। हमें सुनिचित करना होगा की रिटायरमेंट के बाद उनकी आर्थिक हालत ख़राब नहीं हो । हम इन अनुभवी खिलाड़ियो को अच्छी कोचिंग देने के लिए इस्तेमाल कर सकते है ।
  • मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर लाने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) का लाभ देने का आग्रह केंद्र सरकार से करता हूँ ।
  • सचिन ने अपने स्पीच के आखिर में कहा है कि उनके लिए वह दिन सबसे बड़ा दिन होगा जब माता-पिता अपने बच्चों से पढ़ाई करने या खाना खाने की बात पूछने के साथ साथ यह भी पूछेंगे कि आज तुम खेले या नहीं ।

सचिन का भाषण यहां सुनें:

 

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